मंगलवार, 24 नवंबर 2015

अतुल्य भारत या असहिष्णु भारत?

डियर आमिर खान,
आपका प्रशंसक होने के नाते आपका यूं विवादों में आना मुझे अच्छा नहीं लगा। आपको पता है कि असहिष्णुता एक विवादित मुद्दा है तो फिर आपको इस पर बोलने से बचना चाहिए था। आपके रहते मुझे देश में असहिष्णुता का कोई दूसरा उदाहरण नहीं खोजना पड़ेगा।  पिछले साल आपकी फिल्म pk आई थी। फिल्म  में हिंदू देवी-देवताओं का मजाक उड़ाया गया था। बावजूद इसके  ये फिल्म रिलीज हुई। सबने देखी। खूब कमाई की। करोड़ों हिंदू-मुस्लिम की तरह मैंने भी आपकी फिल्म देखी थी। मनोरंजन के लिए। अच्छा लगा था। सच तो ये है कि आप जैसी शख्सियतों को हिंदू-मुस्लिम के चश्मे से देखना भी बेईमानी है। 

आप भी इस बात से इनकार नहीं करेंगे कि अगर ऐसा मजाक किसी दूसरे धर्म के देवी-देवताओं के बारे में होता तो फिल्म कतई रिलीज नहीं हो पाती। फिल्म के एक्टर-प्रॉड्यूसर का  सिर कलम करनेवालों पर करोड़ों का ईमान रखा जाता । कुछ भी हो सकता था। चार्ली एब्दो तो आपको याद ही होगा। लेकिन आपके देश में ऐसा कुछ नहीं हुआ। लोगों ने आपको सिर आंखों पर बिठाया। फिल्म ने रिकॉर्ड तोड़ कमाई की।
  
आप देश के ब्रांड  हैं। टीवी पर आपको हमेशा से भारत की खूबियों का वर्णन करते देखा है। आप ही के मुंह से पहली बार अतुल्य भारत शब्द सुना था। पता नहीं उसमें दिखनेवाले किरदर असल में होते हैं, या यू हीं बनाए जाते हैं। जो भी हो, अच्छा लगता है। फिर अचानक जब आपके मुंह से देश में असहिष्णुता वाली बात सुनी तो अजीब लगा। जो शख्स एक तरफ भारत की खूबियों का बखान करते फिरता है, वो अगर कह रहा है कि असहिष्णुता बढ़ी है तो इसका असर देश की छवि पर तो पड़ेगा ही न। ये आप भी जानते हैं। 

हम आपको सत्यमेव जयते में विश्वास रखने के लिए जानते हैं। आप हमेशा से देश की समस्याओं को लेकर सवाल उठाते रहे हैं। हम जानते हैं कि प्रधानमंत्री का आवास आपकी पहुंच से दूर नहीं है। देर या सवेर आप जब चाहेंगे प्रधानमंत्री से मुलाकात कर सकते हैं। उनके प्रधानमंत्री बनते ही आपने उसने मुलाकात की थी। अगर वाकई में आपको ऐसा लग रहा है कि देश में असहिष्णुता बढ़ी है तो आप उनसे मिलकर अपनी चिंता बता सकते थे। लेकिन आपने ऐसा नहीं किया। मीडिया में जाकर बातें रखी। जबकि आप जानते हैं कि मीडिया में बोलने से सिर्फ बवंडर होगा। कोई हल नहीं। 

आपने बीवी का नाम लेकर देश में असहिष्णुता की बात कही है।  घर-परिवार में बहुत सारी बातें होती है। जब देश में सहिष्णुता को लेकर बहस चल रही है, आपका बॉलीवुड भी इससे अछूता नहीं है तो जाहिर है कि आपके घर में भी इसपर चर्चा जरूर हुई होगी। लेकिन इस बात को जब आप मीडिया के सामने कहते हैं तो बात बढ़ जाती है। लोग इसको अपाकी विचार से जोड़कर देखने लगते हैं।  

आपको देश से जुड़े तमाम मुद्दों पर बोलते देखा है। सुना है। याद है जब आप नर्मादा बचाओ आंदोलन में धरने पर बैठने पहुंच गए थे। और भी अच्छा तब लगा था जब आप अन्ना के मंच पर पहुंचे थे। इसी तरह अगर आप देश में बढ़ती महंगाई को लेकर मोदी सरकार के खिलाफ मुहिम चलाते तो अच्छा लगता। 

खैर, अब आपके समर्थन में कुछ लोग बोलेंगे। कुछ आपके विरोध में। मीडिया को मसाला मिल गया है। टीवी पर बहस होंगी। अखबारों में एडिटोरियल छपेंगे। सोशल साइट्स पर भी बड़ी-बड़ी बाते होंगी। इससे किसे फायदा होगा ये कहने की जरूरत नहीं है, लेकिन देश को जरूर घाटा होगा। इस पर एक बार सोचिएगा जरूर। बाकी, आपकी अगली फिल्म का इंतजार है, हमेशा की तरह। 

2 टिप्‍पणियां:

  1. ब्लॉग बुलेटिन की आज की बुलेटिन, कहीं ई-बुक आपकी नींद तो नहीं चुरा रहे - ब्लॉग बुलेटिन , मे आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

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  2. अंकुर जी, ऐसा लगा मानो मैं अपने ही विचार पढ़ रही हूं... वैसे, ज्यादातर लोगों की राय यहीं है। बहुत सुंदर प्रस्तुति...

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