शुक्रवार, 7 दिसंबर 2012

बेरहम वक्त के फेर में फंसे धोनी


बेरहम वक्त किसी को नहीं छोड़ता। हर किसी को वो अपने सामने घुटने टेकने पर मजबूर कर देता है। वही लोगों को बनाता है। और वही असल में औकात भी दिखा देता है। वक्त से बड़ा कोई नहीं होता। ये अलग बात है कि लोग खुद से सबसे बड़ा समझने लगते हैं।
समय अगर सही हो तो हर फैसला सही हो जाता है। हर चाल सफल हो जाती है। सफलता कदमो को चूमते फिरती है। कल तक गुमनाम गलियों में भटकनेवाला आसमान में तारों की तरह चमकने लगता है। लोग तारीफ करते नहीं थकते। लोग उसकी सफलता को मेहनत का नतीजा बताते हैं। उसकी काबिलियत कहते हैं।
 लेकिन जब वक्त बुरा होता है, तो हर फैसला गलत होने लगता है। हर चाल भटकने लगती है। सफलता उससे दूर चली जाती है। उसके हर फैसले में, हर चाल में लोगों को गलतियां नज़र आने लगती है। वही शख्स, जो कल तक सबसे बड़ा काबिल था, उसी में खामियां नज़र आने लगती है। अपने भी उसपर सवाल उठाने लगते हैं।
महेन्द्र सिंह धोनी। भारतीय क्रिकेट के सबसे सफल कप्तान। जिन्हें कुछ लोग किस्मत किंग भी कहते हैं। वक्त के फेर में फंसे हैं। धोनी के जिस फैसले को, जिस चाल को, क्रिकेट के दिग्गज उनकी काबिलियत का नाम देते नहीं थकते थे, आज वही, धोनी के फैसले पर सवाल उठाने लगे हैं। धोनी से कप्तानी छीनने की बात कह रहे हैं।
 पिछले एक साल से, जो कुछ क्रिकेट के मैदान पर टीम इंडिया के साथ हो रहा है, उसमें धोनी के आलोचक कहीं से गलत भी नहीं लगते। धोनी की हर चाल उल्टी पड़ जाती है। उनके फैसले गलत साबित हो रहे हैं। टीम इंडिया, एक के बाद एक मैच हार रही है। पहले विदेशों में हारकर आई। और अब घर में मिट्टी पलीद हो रही है। टर्निंग पिच का भी पड़ोसी फायदा उठाकर चले जाते हैं । हमारे शेर ढेर हो जाते हैं।
हार के साथ-साथ धोनी के स्वभाव पर भी सवाल उठने लगे हैं। कैप्टन कूल का तमगा देनेवाले, आज उन्हें घमंडी और अक्खड़ कहते फिरते हैं। कैप्टन कूल अचानक लोगों से उलझने लगा। कभी पिच क्यूरेटर से। कभी अंपायर से। नये और युवा खिलाड़ियों को अपने विश्वास में लेकर पहला टी ट्वेंटी का किताब जितानेवाले धोनी का साथी खिलाड़ियों से मन मुटाव की ख़बर आम है।

वाकई, वक्त बेरहम होता है। अगर वो पलभर में जमीन से आसामन में बिठा देता है, तो उसे आसमान से जमीन पर उतारने में भी वक्त नहीं लगता। वक्त का खेल सिर्फ धोनी के संग नहीं। हर किसी के साथ होता है। धोनी चूकी धोनी हैं। इसलिए मीडिया की सुर्खी हैं। वरना इस फेर में हो हर कोई है....

सोमवार, 26 नवंबर 2012

जज्बात और जुनून पर बाजार भारी


प्यार बाज़ार में नहीं मिलता। इज्जत भी बाज़ार में नहीं मिलती। बाज़ार में बंदूकें मिलती हैं। लेकिन इत्तफाक देखिए कि मुहब्बत और इज्ज़त जब आमने-सामने होती है, तो फैसला बंदूकें किया करती है। यानी जज़्बात और जुनून पर बाज़ार कहीं ज़्यादा हावी है। और इसी बाज़ारबाद के आसरे आमिर खान उस सिस्टम को चुनौती देने चले थे, जिसका मुखालफत करनेवाले मुट्ठीभर लोग हैं।
आमिर खान ने देशभर के कुछ प्रेमी जोड़ियों को इकट्ठा कर टीवी शो के जरिए सीधे उन्हें बाजार में खड़ा कर दिया। उनकी हिम्मत को बेचा। टीवी शो को देखकर लोगों ने आमिर से लेकर वहां मौजूद प्रेमी जोड़ियों की हिम्मत की तारीफ की। बाजार की चर्चा से लगने लगा कि वाकई कुछ बदलने वाला है। लेकिन शो खत्म होने के तीन महीने बाद ही आमिर की तमाम थ्योरी फ्लॉप हो गई। आमिर खान ने जिन चुनिन्दा प्रेमी जोड़ियों को अपने टीवी शो में हीरो बनाया था, उन्हीं में से एक लड़के का बुलंदशहर में कत्ल कर दिया गया। इज्ज़त की खातिर अपनों ने ही उसे गोली मार दी।
सवाल उठता है कि क्या इज्जत से बढ़कर बाजार है। क्योंकि जो इज्जत की दुहाई देकर अपनो का कत्ल करते हैं, वे प्यार को बाजारबाद का नतीजा बताते हैं। उनकी नज़र में प्यार वो बाजारू एहसास है, जिसकी कोई इज्जत नहीं होती। ऐसे लोग उस बाजारू अहसास को खत्म करने के लिए बाजार में बिकने वाले चंद रूपये की बंदूक का सहारा लेते हैं।
यानी हर स्थिति में जीत बाजार की है। ये अलग बात है कि इस बाजार में कैंसर की तरह जड़ जमा चुकी बंदूक जैसी प्रॉडक्ट के सामने आमिर खान की लैबरेटरी का प्रॉडक्ट टिक नहीं पाता है।


शुक्रवार, 23 नवंबर 2012

उम्मीदों की राजनीति


देश की कुछ बड़ी उम्मीदों के ईर्द गिर्द पूरी राजनीति घूम रही है। संसद से सड़क तक उम्मीदों की राजनीति हो रही है । एफडीआई को लेकर बीजेपी संसद में कोहराम मचा रखी है । बीजेपी नियम 184 के तहत वोटिंग कराने की मांग कर रही है। बीजेपी को भरोसा है कि सदन में अगर वोटिंग होगी, तो सरकार का किराना में विदेशी निवेश का सपना चकनाचूर हो जाएगा। सरकार की किरकिरी होगी तो बीजेपी की जीत होगी। बीजेपी उनलोगों के लिए सबसे बड़ा मसीहा बनकर उभरेगी, जिन्हें लगता है कि एफडीआई से उनकी नौकरी पर खतरा है। लेकिन पूरी सरकार को एफडीआई से ही उम्मीद है। प्रधानमंत्री को विश्वास है कि एफडीआई से अर्थव्यवस्था को मज़बूती मिलेगी। लाखों लोगों को रोजगार मिलेगा। भ्रष्टाचार और महंगाई से काली हो चुकी छवि थोड़ी साफ होगी। इसलिए अपनी-अपनी उम्मीदों को लेकर दोनों बड़े दल अड़े हुए हैं।
 उम्मीदों की एक और बड़ी राजनीति बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार कर रहे हैं। नीतीश कुमार बिहार को विशेष राज्य का दर्जा दिलाने के लिए कुछ भी करने को तैयार हैं। गांधी मैदान के बाद अब वो लोगों को लेकर दिल्ली के रामलीला मैदान जाने की तैयारी में हैं। नीतीश कुमार को लगता है कि बिहार को विशेष राज्य का दर्जा मिल जाएगा, तो राज्य के विकास की रफ्तार, राजधानी एक्सप्रेस से कहीं ज्यादा तेज़ हो जाएगी। विशेष राज्य के दर्जा मिलने से वो सबकुछ हासिल कर लेंगे, जो बिहार के लोग सपने में सोचते हैं।
देश में संपूर्ण परिवर्तन के लिए लड़ रहे अन्ना हजारे और अरविंद केजरीवाल सरीखे लोगों को  है कि लोकपाल के आसरे देश से भ्रष्टाचार खत्म करना चाहते हैं । उनको लगता है कि जन लोकपाल बन जाने से सरकारी दफ्तरों में घुसखोरी बंद हो जाएगी । छोटे-बड़े घोटाले नहीं होंगे । इसके लिए टीम अन्ना आंदोलन कर रही है तो टीम केजरीवाल चुनाव चिह्न के साथ चुनावी मैदान में उतरने के लिए कमर कस चुकी है।
बाबा रामदेव को यकीन है कि विदेशों में जमा काला धन अगर वापस अपने देश में लाया जाएगा तो महंगाई और गरीबी दोनों खत्म  जाएगी । इसके लिए बाबा, बार-बार सरकार पर हमला बोलते हैं। सरकार के खिलाफ लोगों को एकजुट करने के लिए देशभर की यात्रा कर चुके हैं। दो बार में रामलीला मैदान में भी लिलाएं दिखा चुके है
ये कुछ बड़ी उम्मीदें हैं। जो सबसे ज्यादा चर्चा में है। यकीनन उम्मीद बड़े काम की चीज है। उम्मीद न होती, तो हम और आप न होते। कोई काम नहीं होता। उम्मीद न होती तो राजनीति न होती। उम्मीद न होती, तो मैं ये चिट्ठा न लिखता। इसलिए उम्मीद है कि आप इसे पढ़कर जरूर कॉमेंट करेंगे । 

मंगलवार, 30 अक्टूबर 2012

इंदिरा - ‘द आयरन लेडी’


इंदिरा प्रियदर्शनी गांधी । यानी इंदिरा गांधी। कभी हार नहीं माननेवाली गांधी । दुश्मनों को धूल चटानेवाली गांधी । भारत को परमाणु संपन्न देश बनानेवाली गांधी । दुनिया को भारत की ताक़त का अहसास करानेवाली गांधी । अमेरिका को आर्थिक चुनौती देनेवाली गांधी । खालिस्तान राष्ट्र की मांग करनेवाले देशद्रोहियों को मटियामेट करनेवाली गांधी । पाकिस्तान को नाक रगड़वानेवाली गांधी । विश्व के मानचित्र पर बंग्लादेश बनवाने वाली गांधी । दोस्तों के दोस्त और दुश्मनों के सब से बड़े दुश्मन के रूप में विश्व विख्यात वीर, साहसी और सच्चे राष्ट्रभक्त गांधी । राजनीति में हार कर भी जीतनेवाली गांधी । आमलोगों से मिलने के लिए ट्रैक्टर, हाथी और नाव की सवारी करनेवाली गांधी । एक असाधारण हिम्मतवाली महिला । आयरन लेडी । जिसे राजनैतिक दुश्मनों ने भी कभी दुर्गा कहा तो कभी सच्चा राष्ट्रभक्त । जिसके बारे मे किसी ने कहा है कि उनका नाम देश के महानतम प्रधानमंत्रियों में शामिल किया जाएगा । क्योंकि वो बेहद शाहसी और राष्ट्रीय हितों के प्रति समर्पित थी । राष्ट्र निर्माता के रूप में उनसे ऊपर सिर्फ उनके पिता थे । 

गुरुवार, 25 अक्टूबर 2012

नेताजी का इंटरव्यू


नमस्कार....अभी हमारे साथ मौज़ूद हैं हिमाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के दिग्गज नेता, जो घोटालों की मंडी में वीबीएस के नाम से मशहूर हैं । नेताजी ने घोटाले को नया आयाम दिया है । इन्होंने पेड़ पर पैसा उगाकर नई तकनीक इजाद की है। आजकल धमकी-माफी को लेकर काफी चर्चा में है । नेताजी से हम कई मुद्दों पर बात करेंगे । नेताजी आपका बहुत बहुत स्वागत है.....
नेताजी- जी धन्यवाद
पहला सवाल- नेताजी, कैमारा देखते ही आपका पारा सातवें आसमान पर क्यों चढ़ जाता है । कुछ दिन पहले आपने एक कैमरामैन को कैमरा तोड़ देने की धमकी दी ।
नेताजी- देखिए, आप पत्रकार कुछ समझते नहीं है । कब क्या पूछना चाहिए, किस मुद्दे पर चर्चा करनी चाहिए इसको लेकर कतई गंभीर नहीं हैं । खासकर ये टीवी मीडिया वाले तो और ज्यादा । निकलते हैं चुनावी सभा करने और प्रश्न पूछने लगते हैं कि घोटाला कैसे किया । कब किया । क्यो किया । आजकल हम वैसे ही बहुत टेंशन में हैं । अब उम्र भी ज्यादा हो चुकी है । पांच बरस पहले हाथ से गई कुर्सी वापस पाने की जुगाड़ में लगे हैं । दिन रात हिसाब किताब में लगे रहते हैं । ऊपर से ये लोग कैमरा चमकाने आ जाते हैं । स्वभाविक है गुस्सा तो आएगा ही।  
दूसरा सवाल- नेताजी, आपने नई तकनीक इजाद की है...पेड़ पर पैसा उगाया है, क्या कुछ बताएंगे इसके बारे में....ये कैसे संभव हो पाया...
नेताजी- आप भी वही सवाल लेकर बैठ गए। आप लोग समझने की कोशिश क्यों नहीं करते हैं। पेड़ पर पैसा उगाने का टेक्निक हम सरेआम कैसे बता सकते हैं। हमारे सहयोगी सब जमीन में उगाते हैं हम पेड़ पर उगा लिये । इसमें कौन सा अनर्थ हो गया ।
सवाल- अगर आप तकनीक के बारे में बता देते तो देश के महा अर्थशास्त्री प्रधानमंत्री डॉक्टर मनमोहन सिंह जी का भी ज्ञान वर्धन होगा, जो कहते हैं कि पैसा पेड़ पर नहीं उगता ।
नेताजी- अरे भाई, सब पता है उनको ।
सवाल- तो फिर उन्होंने अपने भाषण में क्यों कहा कि पैसा पेड़ पर नहीं उगते...
नेताजी- देखिए, वो अपना भाषण खुद तैयार तो करते नहीं । दूसरा जो लिखकर दे देता है, वो उसे पढ़ देते हैं । उनकी हिन्दी कमजोर हैं । वो खुद नहीं समझते हैं कि क्या पढ़े हैं । बाद में जब मीडिया में हल्ला होने लगता है तब वो दूसरों से पूछते हैं कि मैंने क्या कहा ।
सवाल- सुने हैं कि आपने इंकम टैक्स में घपला किया है..
नेताजी- सब बकवास है,,,,ऐसा कुछ भी नहीं है...मेरे ऊपर लगे सारे आरोप निराधार हैं....अब आपका समय समाप्त हुआ...अब जा सकते हैं....धन्यवाद....
जी, धन्यवाद..... 

बुधवार, 24 अक्टूबर 2012

गडकरी, आरोप और इस्तीफा


    जमीन के जंजाल से उबरे भी नहीं थे कि भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन गडकरी कंपनी में फर्जीवाड़े के आरोप में कटघरे में हैं । टाइम्स ऑफ इंडिया की माने तो गडकरी ने अपनी कंपनी में चपरासी, ड्राइवर, बेकर से लेकर ज्योतिषी तक को डायरेक्टर बना दिया है । वाड्रा, वीरभद्र और खुर्शीद को लेकर फजीहत झेल रही कांग्रेस को भी हल्ला बोलने का मौका मिल गया है । इधर पार्टी के भीतर से भी गडकरी को लेकर सवाल उठने लगे हैं । संघ ने भी पल्ला झाड़ लिया है । ऐसे में सवाल उठता है कि क्या नितिन गडकरी को अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे देना चाहिए ।
     देशभर में भ्रष्टाचार को लेकर कंग्रेस की किचकिच हो रही है । एक के बाद एक यूपीए के मंत्री पर घोटालों के आरोप लग रहे हैं । बीजेपी भ्रष्टाचार और महंगाई को हथियार बनाकर यूपीए सरकार पर वार कर रही है । ऐसे में अगर नितिन गडकरी अपने ऊपर लगे आरोप गलत साबित होने तक बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद से इस्तीफा देते हैं  या  फिर दोबारा अध्यक्ष बनने  से इनकार करते हैं तो इससे न सिर्फ बीजेपी का बल्कि गडकरी का भी साख बढ़ेगा । पार्टी को कांग्रेस के खिलाफ भ्रष्टाचार के जरिए वार करने में और मजबूती मिलेगी ।
       जिस तरह से कांग्रेस के नेता और मंत्री पुख्ता आरोपों के बावजूद न तो अपनी कुर्सी छोड़ रहे हैं और न ही जांच के लिए तैयार हैं, ऐसे में गडकरी के इस्तीफे से बीजेपी के नेता और आसानी से कांग्रेस पर वार कर सकते हैं । बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन गडकरी  के इस फैसले का गुजरात और हिमाचल प्रदेश में होनेवाले चुनाव के अलावा 2014 में होनेवाले लोकसभा चुनाव में भी फायदा मिल सकता है ।
      गडकरी इस्तीफा देकर न सिर्फ विरोधियों को मुंहतोड़ जवाब दे सकते हैं, बल्कि पार्टी के भीतर जो विरोधी हैं उनका मुंह भी बंद कर सकते हैं । क्योंकि पिछले कुछ दिनों से पार्टी के भीतर से भी गडकरी को लेकर सवाल उठने लगे हैं । रामजेठ मलानी ने तो बकायदा इस्तीफे की मांग कर दी है ।  
      बीजेपी को भी इस पर गंभीरता से सोचना चाहिए । अगर गडकरी इस्तीफा नहीं देते हैं तो आखिर बीजेपी किस मुंह से कांग्रेस नेताओं से इस्तीफा मांगेगी । क्या दलील देकर कांग्रेस नेताओं की जांच की मांग करेगी । क्योंकि इस्तीफा देने से पार्टी के पास विरोधियों और मीडिया को देने के लिए जवाब होगा । अगर नितिन गडकरी अब भी आरोपो को चिल्लर बताते रहेंगे तो आगामी चुनाव में जब पार्टी चिल्लर बनकर सामने आएगी, तो न ही गडकरी के पास जवाब होगा और न ही बीजेपी के पास । 

सोमवार, 22 अक्टूबर 2012

बड़े लोग...बड़ी बात


अरे भाई, सुने हैं कि मंत्री जी के ट्रस्ट से उन लोगों को भी सामान मिला है...जिनकी मौत कई बरस पहले हो चुकी है....कई के बारे में तो ये भी सुना है कि पैर में बीमारी है और कान की मशीन मिल गई....मंत्री जी कभी क्षेत्र में घूमने नहीं जाते हैं क्या....
अरे भाई साब, आप भी ग़ज़बे बात करते हैं.... क्षेत्र में घूमने के लिए लोग मंत्री बनता है का....उनका फेस देखा है आपने... सेब की तरह लाल है... बड़े-बड़े लोगों के साथ उठक-बइठक करते हैं... गोरी गोरी मेम साब सब से मिलना होता है.... बताइए तो... अगर क्षेत्र में घूमेंगे....तो फेस काला नहीं पड़ जाएगा....बीमारो हो सकते हैं न.....स्टेटस का ख्याल रखना पड़ता है ...इसलिए कोई बड़ा नेता क्षेत्र में नहीं घूमता है.....वैसे टाइमो तो नहिये न मिलता है... देखिए न....कानून मंत्री हैं...साथ में अल्पसंख्यक कल्याण मंत्रालय भी है.... देश भर के बारे में उन्हें सोचना है....फिर पार्टी के बारे में.....मैडम का टीटीएम करने में टाइम लगता है....फिर विलायत जाकर बड़का यूनिवर्सिटी में पढ़ाते भी न हैं....
अच्छा, तो इसीलिए केजरीवाल को अंग्रेजी में ऐसी गाली दिए कि बहुत लोगों समझ में भी नहीं आया....
हां भाई साब, बड़े लोग की इहे तो खासियत होती है...गाली में भी स्टैंडर्ड खोजता है.....अइसन वइसन गाली तो नेता सब की आम भाषा हो गई है....ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी में पढ़ने और पढ़ाने का इहे सब तो फायदा है....कि गाली भी सुर्खी बन जाती है....
सुने हैं कि प्रेस कांफ्रेंस के लिए पत्रकारों को घर पर बुलाये थे.....लेकिन एक टीवी चैनल वाले पर बहुत गुस्सा गये.....
खिसियाते नहीं तो क्या करते....ऊ बार-बार उनको डिस्टर्ब कर रहा था...पहले तो मंत्रीजी के खिलाफ स्टोरी चला दी....और फिर उन्हीं के घर जाकर सबूत दिखाने लगा...अरे भाई सबूत है तो रखिए न.....जाने दीजिए...अइसन एगो दूगो सबूत है सरकार के पास....हजारो है.....लेकिन कभी निकालती है क्या....वो भी सरेआम...कैमरा...टीवी....मीडिया के सामने....
जो भी हो, लेकिन मंत्री होकर लहू से होली खेलने वाली बात नहीं कहनी चाहिए.....
क्या करते भाई साब ऊ भी.....अरे ऊ भी आदमिये हैं...उसमें भी नेता हैं....देखिए बात ई है कि इस बार के आरोप में स्याही और कलम से बरी नहीं सकते...तो अंतिम उपाय तो करना ही पड़ेगा न....दो दिन पहिलेहे बोले थे कि मैडम के लिए जान दे देंगे....जो दूसरों के लिए जान देगा ऊ अपने लिए ले नहीं सकता है का....वैसे भी नेता..मंत्री के लिए.....लहू....होली....जिंदगी...मौत....घोटाला...आरोप.. समझ गए न....
हां भाई सब समझ गए भाई....बड़े लोग....बड़ी बात...